जानता हुं, तुझे मेरी जरुरत नही,
पर मानता नही, मेरे बिना तु अधुरी नही,
कुछ इस तरहसे उलझे हैं रिश्ते हमारे,
जो तु नही तो मैं नही,
जो मैं नही, तो तु है ही नही.
पर मानता नही, मेरे बिना तु अधुरी नही,
कुछ इस तरहसे उलझे हैं रिश्ते हमारे,
जो तु नही तो मैं नही,
जो मैं नही, तो तु है ही नही.
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