जो कहना है मुझसे आज ही कहो,
शायद कल हम रहे ना रहे,
फुल बरसाओ या कांटे तुम्हारी मर्जी,
शायद कल आंखमे आंसुभी ना रहे. (१)
जिंदगी और मौतके बिच सीर्फ सांसोंका फासला है,
और मेरी सांस तुझमे अटकी है,
अब जिंदा रहुं या मर जाऊं ये तुम्हारी मर्जी। (२)
नाम मे क्या रखा हैं यारो ,
बस अपने दिल मे जगह do,
जाब भी याद आये मेरी ,
बस दिलसे आवाज दो (१४)
वक़्त जो चला गया ,
वो लौट के आता नही,
लब्ज जो फिसल गया जुबांसे,
वो दिलसे कभी जाता नही (१५)
दिलसे निकली बात जुबां पे आये तो कोई बात नही,
पर जुबांसे निकली हर बात दिलपे लो ये अच्छी बात नही. (१६)
तुम जब चाहो मेरी जिंदगीसे खेल सकते हो
पर मेरे दिलसे मत खेलना
एक वोही कमरा बचा हैं मेरा अपना,
जिसमे तेरी यादे बसी हैं, उन्हे तुम मत छेडना (१७)
तेरी राहोंसे मेरी राहे जुदा हो गयी,
ये किस्मत की हैं बात,
पर तुम आजभी बसी हो मेरे दिलमे,
ये हैं मुहोब्बत की बात. (१८)
शायद कल हम रहे ना रहे,
फुल बरसाओ या कांटे तुम्हारी मर्जी,
शायद कल आंखमे आंसुभी ना रहे. (१)
जिंदगी और मौतके बिच सीर्फ सांसोंका फासला है,
और मेरी सांस तुझमे अटकी है,
अब जिंदा रहुं या मर जाऊं ये तुम्हारी मर्जी। (२)
परींदोंसे मैने ऊडना सीखा,
पर शहरसे मैने बसना नहीं सीखा,
तेरे साथ मैने हंसना तो सीखा,
पर औरोंके गम बांटना नहीं सीखा।
ये दोस्तीका असर है तुम्हारी,
जो मैं तुम्हे आज ईस तरह दिख रहा हुं,
वरना गलतियोंसेभरी जिंदगी थी मेरी,
ऊन गलतियोंसेभी मैने कुछ ना सीखा।
अब तुम्हे भुल जाऊं ये मुमकिन नहीं,
बिच राहमे तुम्हे छोड दुं ऐसी मेरी फितरत नहीं,
मै ये भी जानता हुं के लोग ताने मारेंगे इस बात पर,
लेकिन मैनेभी एक बार कदम बढाया, तो पिछे मुडना नहीं सीखा । (३)
खुदा और ईन्सान मे बस इतना फर्क है गालिब,
पहले को हम मानते हैं,
और दुसरे को हम जानते भी नही. (४)
गम इस बातका नही की,
दोस्तसे दोखा खा गये,
उस वक़्तभी उसके आंखोमे आंसु थे,
वो आंसु दर्द ज्यादा दे गये (५)
मै वो हर बाजी हारनेको तयार हुं,
जहा दोस्ती दांवपे लगी हो. (६)
उसने कहा साथ छोडो,
मैने कहा पहले हाथ छोडो,
ना हाथ छुटा ना साथ,
दोस्ती बर-करार रही (७)
कहते हैं कुछ पानेके लिये कुछ खोना पडता हैं,
पर मेरे दोस्त, तुझे खोके कुछ पाऊ,
ये ना मेरी हसरत हैं, ना मेरी फ़ितरत. (८)
तेरी खामोशीसे बेहतर हैं दोस्त,
की खामोशीसे कट जाऊ मैं
तेरी जुबांसे निकले एक लब्जकी खातीर
सारी उम्र बेजुबां रहु मैं. (९)
सिर्फ आंख बंद करके निंद आती,
तो कितना अच्छा होता,
सिली जुबांसे बात बनती,
तो कितना अच्छ होता,
पर क्या ये मुमकिन हैं ?
अगर मुमकिन हैं,
तो बिना निभाये ही रिश्ते सम्हल जाते,
तो कितना अच्छा होता. (१०)
हम तो उनकी नझर के गिरफ्तमे आ गये,
पर उन्हे क्या पता की वोह भी कहा बचे हैं (११)
गम इस बात का नही की बेआबरू करके दिलसे निकल या मुझे,
पर इस बात का जरूर रहेगा,
जिन्हे पनाह दि अपने दिलमे क्या वो उसके हक़दार हैं ? (१२)
ए जिंदगी तुझे जीनेमे इतने मश्गुल हुए हम,
के तुने क्या दिया ये भी भुल गये हम.
दौलत शोहरत तो खुब दी तुने,
पर यारोंसे मिलके तो तेरे गुलाम हुए हम (१३)
बस अपने दिल मे जगह do,
जाब भी याद आये मेरी ,
बस दिलसे आवाज दो (१४)
वक़्त जो चला गया ,
वो लौट के आता नही,
लब्ज जो फिसल गया जुबांसे,
वो दिलसे कभी जाता नही (१५)
दिलसे निकली बात जुबां पे आये तो कोई बात नही,
पर जुबांसे निकली हर बात दिलपे लो ये अच्छी बात नही. (१६)
तुम जब चाहो मेरी जिंदगीसे खेल सकते हो
पर मेरे दिलसे मत खेलना
एक वोही कमरा बचा हैं मेरा अपना,
जिसमे तेरी यादे बसी हैं, उन्हे तुम मत छेडना (१७)
तेरी राहोंसे मेरी राहे जुदा हो गयी,
ये किस्मत की हैं बात,
पर तुम आजभी बसी हो मेरे दिलमे,
ये हैं मुहोब्बत की बात. (१८)
subhanallah....
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