Monday, 24 November 2014

रिश्तोंकी सर्कस है ये जिंदगी, 
उन्हे निभानेकी कसरत है ये जिंदगी,
हर शक्स झुलेपे झुल रहा है,
कभी कभी तो मौतका कुआ है ये जिंदगी.

कितनेही शेरोको इसने चुहा बनाया है,
रिंगमास्टरके इशारोपे नाचनेको मजबुर किया है,
हाथीसे भी इसने उठक बैठक निकलवाई है,
इन्सानको तो इसने जोकर तक बनवाय है 
ऐसी है ये जिंदगी.

कोशिश करोगे उतनी उलझती जाएगी,
ध्यानसे पढो इसे, तभी ये सुलझती जाएगी.
उम्रभरका गम भी देती है ये जिंदगी,
खुशीयोसे दामन भर देती है येही जिंदगी.

कितने तुर्रम फना हो गये इसे समझते समझते,
कितने सिकंदर मिट्टीका ढेर हुए, इसको जितने की चाहमे,
पर अब तक न इसे कोई ठीकसे समझ पाया है इसे,
कभी अपनिसी तो कभी अजनबिसी लगती है ये जिंदगी.

रिश्तोंकी सर्कस है ये जिंदगी, 
उन्हे निभानेकी कसरत है ये जिंदगी,
हर शक्स झुलेपे झुल रहा है,
कभी कभी तो मौतका कुआ है ये जिंदगी.

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