Saturday, 22 November 2014

अब तो सोने दे मुझे काफिर,
जब तु भी सो गया है,
क्यो मेरे ख्वाबोको छुके,
मेरी निन्दोसे खेल रहा है.

अब जागनेसे थक चुका हुं मै,
निंद मे तो मुझे सोने दो,
तेरी याद है की जाती नही है,
पर अब खुदा के लिये मुझे सोने दो,

नही जानता की तुम क्या सोच रहे हो,
शायद अपनीही बातोंमे खोये हो,
अब एक इनायत मुझपे भी कर दो,
मुझे अपनी तनहाइयोमे रहने दो.

तु अपनी आदतसे परेशान है,
और मै अपनी फितरतसे,
पर तुझे तो निंद सौगात मे मिली है,
और मुझे जागनेकी तकदीर.

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