Sunday, 4 October 2015



इसे तुम प्यार समझो या मेरी कमजोरी फराज,

अब नींद भी जागती है तो बस तुम्हे सोचते …. (१)



तुम कहते हो, तुम्हे प्यार नही मुझसे फराज,

शिकायत तब होती, अगर ऐतबार न होता मुझसे  …. (२)



तुमसे प्यार का इक्बाल ए जुर्म कर दिया हमने फराज, 

अब सजा दो या वफा, तुम्हारी मर्जी …. (३)



दो बुंद क्या निकले उसकी आंखोंसे फराज,

यहां तो बारीशोके जमाने आ गये …. (४)

1 comment:

  1. Wah wah..
    One question: Aitabaar muzhase Ki muzape? Ki donhi chalata?

    ReplyDelete