एक शाम ढलती हुई :
कभी देखा है तुमने शाम ढलते हुए,
आसमाको अपना रंग बदलते हुए,
पंछीओंको घर लौटते हुए,
एक उदासी भरा माहौल होता है.
मैने भी देखा है उसे,
मेरे दिल में अंधेरा करके,
अपने घर लौटते हुए,
रुकते हुए पैरोको खिंचते हुए,
दुर दुर तक मुझपे निगाहे जमाके,
मेरी तकदीर को मुझसे दुर ले जाते हुए,
उसके चेहरेका नुर भी,
आसमाके रंग की तरह बदल रहा था,
आखोसें बरसते अश्कोंसे,
उसका गुलाबी चेहेरा गिला हो रहा था.
कहना था बहुत कुछ,
मगर जुबापे आनेसे कतरा रहा था.
मैं तो अमावस के चांद की तरह,
अपने आप को महसुस कर रहा था.
आसमामे होते हुए भी,
ना दिखनेकी कोशिश कर रहा था.
ये जानते हुए वो शाम अब फिर ना आयेगी,
एक जो आसमामे ढल रही थी,
एक मेरे दिलमे अंधेरा कर रही थी,
हमेशा के लिये.
कभी देखा है तुमने शाम ढलते हुए,
आसमाको अपना रंग बदलते हुए,
पंछीओंको घर लौटते हुए,
एक उदासी भरा माहौल होता है.
मैने भी देखा है उसे,
मेरे दिल में अंधेरा करके,
अपने घर लौटते हुए,
रुकते हुए पैरोको खिंचते हुए,
दुर दुर तक मुझपे निगाहे जमाके,
मेरी तकदीर को मुझसे दुर ले जाते हुए,
उसके चेहरेका नुर भी,
आसमाके रंग की तरह बदल रहा था,
आखोसें बरसते अश्कोंसे,
उसका गुलाबी चेहेरा गिला हो रहा था.
कहना था बहुत कुछ,
मगर जुबापे आनेसे कतरा रहा था.
मैं तो अमावस के चांद की तरह,
अपने आप को महसुस कर रहा था.
आसमामे होते हुए भी,
ना दिखनेकी कोशिश कर रहा था.
ये जानते हुए वो शाम अब फिर ना आयेगी,
एक जो आसमामे ढल रही थी,
एक मेरे दिलमे अंधेरा कर रही थी,
हमेशा के लिये.
Wow....Gokul....you have done it again ! Great poetry....reminds me of Gulzar...
ReplyDelete