Thursday, 30 July 2015



अपनेआपसे भागता रहा मैं जिंदगीभर,
तुम्हारे आनेसे रस्ते, मंजिल बन गये,
जिना जैसे नफरतसा बन गया था मेरे लिये,
तेरे आनेसे जीनेके बहाने मील गये ……


जमानेको तो तेरे नाम से भी नफरत है फराज,
और मुझे जमानेकी नफ़रतसे मुहोब्बत ….


इंकार कि कोई वजह तो होगी फराज,
या बस मेरा नाम हि काफी है ……

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