सपनो को हकीकत बना सकता हुं मै फराज,
पर हकीकत ये है, मै अब सपने नही देखता ….
हमे भुलाना इतना आसां ना होगा फराज,
कई राते गुजारी है, तुम्हारी याद मे हमने भी ….
प्यार भी करते हो, और लोगोका डर भी है,
मिट्टीका घर बनाना है, और हाथमे किचडभी ना लगे ….
उनपे शायरी करना बडा आसां है फराज,
खुबसुरतीका वोह आलम है, कि हर लब्ज शायरी है ….
ना भी ना करना और हां से दुर भागना, ये कब तक चलेगा फराज,
देखना, ये कही तुम्हारी फ़ितरत ना बन जाये …
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