मै तो पत्थरोको तोडने चला था,
किसे पता था, उसमे तेरा दिल भी होगा ......
परायेपनका अहसास तब हुआ,
जब मैने बीना दस्तक दिये घरमे कदम रख्खा,
और तुम्हारे चेहरेकी सिलवटे बदल गयी .......
अपनीही परछाईसे कबसे डरने लगे तुम,
शायद अंधेरोसे यारीया बढ गयी है तुम्हारी ......
अगर शिद्दत ना होती, तो तुझसेहि प्यार क्यो करता,
हारनेका डर होता, तो दिल का कारोबारहि क्यो करता .....
तेरी चौखटपे जान जाये, तो इल्जाम अपने सर मत लेना,
कह देना, दिवाना था कोई, अंजाम पा गया ......
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